Saturday, April 18News That Matters

मातृशक्ति के अधिकारों को संसद में रोकना लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ, विपक्ष को हर चुनाव में चुकानी होगी कीमत: मुख्यमंत्री धामी

मातृशक्ति के अधिकारों को संसद में रोकना लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ, विपक्ष को हर चुनाव में चुकानी होगी कीमत: मुख्यमंत्री धामी

भाजपा ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को बाधित करने और उसे अपनी जीत बताने वाले विपक्षी दावों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा ने विपक्ष के इस कृत्य को ‘महिला विरोधी मानसिकता’ का परिचायक और बेहद शर्मनाक करार दिया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने इस पर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने वर्ष 2029 में महिला आरक्षण लागू होने के करोड़ों महिलाओं के सपने को अपने नकारात्मक वोटों से चोट पहुँचाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस और उसके साथियों ने भले ही आज सदन में वोट की राजनीति कर महिलाओं के अधिकारों का रास्ता रोकने का प्रयास किया हो, लेकिन वे देश की मातृशक्ति के हौसलों को नहीं तोड़ पाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की महिलाएं जागृत हैं और आने वाले सभी चुनावों में जनता इस विपक्ष को संसद और विधानसभाओं में वोट देने के लायक भी नहीं छोड़ेगी।
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन की महिला अधिकारों को लेकर पोल खोलकर रख दी है। ये दल पिछले 70 वर्षों से महिलाओं को छलते आए हैं और आज एक बार फिर सदन के भीतर उन्होंने वही पुराना इतिहास दोहराया है। विपक्ष की इस घृणित सोच ने यह सिद्ध कर दिया है कि उनके लिए महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा है। उन्होंने 2023 में 2024 चुनाव की मजबूरी में इस बिल का समर्थन कर मातृ शक्ति को धोखा दिया था।
प्रदेश अध्यक्ष ने सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति विपक्षी महिला सांसदों के रुख को बताया। उन्होंने कहा कि यह बेहद अफसोसजनक है कि विपक्ष की महिला सांसदों ने भी अपनी ही साथी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय दलगत राजनीति को ऊपर रखा। अब ये नेता अपने घरों और समाज में माताओं-बहनों से किस प्रकार नजरें मिलाएंगे?

वही मुख्यमंत्री धामी ने कहा नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे ऐतिहासिक संविधान संशोधन को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मिलकर रोक दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले बिल का विरोध करना ही नहीं, बल्कि उसका मज़ाक उड़ाना और जश्न मनाना, यह केवल राजनीति नहीं, नारीशक्ति का अपमान है।

देश की बेटियों, बहनों और माताओं का जो हक था, उसे फिर एक बार छीन लिया गया और यह पहली बार नहीं है कांग्रेस और उसके सहयोगी पहले भी महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में अवरोध बनते रहे हैं।

2029 ही नहीं, हर चुनाव में, हर स्तर पर, हर जगह विपक्ष को इस शर्मनाक कृत्य की क़ीमत चुकानी पड़ेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *