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निष्ठा को नकारा गया, अफवाहों को सराहा गया — ये कैसा समाज?”   

निष्ठा को नकारा गया, अफवाहों को सराहा गया — ये कैसा समाज?”  

उत्तराखंड
  "निष्ठा को नकारा गया, अफवाहों को सराहा गया — ये कैसा समाज?" एक अफसर... जिसकी ज़िंदगी का हर दिन राज्य के नाम रहा। जिसने सूचना के माध्यम से सरकार और जनता के बीच एक भरोसे का पुल बनया आज वही अफसर, डीजी सूचना बंशीधर तिवारी , सोशल मीडिया की झूठी अफवाहों का शिकार बन गए हैं। ये "आरोप नहीं, यह आत्मा पर प्रहार है" तस्वीरों के पीछे का सच अक्सर लोग नहीं देख पाते। शब्दों की दुनिया में जब चरित्र पर आघात होता है, तो वह सिर्फ सम्मान नहीं छीनता — वह एक जीवन की मेहनत, ईमानदारी और निष्ठा को अपमान के अंधेरे में धकेल देता है। डीज़ी सूचना ने कहा कि "मेरे खिलाफ बेबुनियाद बातें फैलाई जा रही हैं…" — ये शब्द किसी साधारण अधिकारी के नहीं थे। ये उस व्यक्ति की पीड़ा थी जिसने सूचना विभाग को न केवल पेशेवर गरिमा दी, बल्कि खुद की पहचान एक सादगी भरे, इंसान के रूप में पेश करी.. और बोलता है उत्तराख...